indianbaaznews.online…..Shekh Mustak….
आज जहां एक ओर दुनिया श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और उनके योगदान को नमन कर रही है वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की राजनीति में श्रम, संघर्ष और संगठन की ताकत को जीवन में उतारने वाले एक जननायक का जन्मदिन पूरे जोश-खरोश और प्यार से मनाया जा रहा है। जिस तरह परिश्रम का सम्मान और न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना मज़दूर दिवस की मूल भावना है। यही भावना बृजमोहन अग्रवाल के जीवन और उनके राजनीतिक यात्रा में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
बृजमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में रायपुर का जो कायाकल्प हुआ उसे कभी भुलाया नही जा सकेगा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, पुरखौती मुक्तांगन और महादेव घाट का विकास यह सब महज़ निर्माण कार्य नहीं हैं बल्कि यह उस सोच का प्रतीक हैं जो एक शहर को पहचान दिलाने के लिए ज़रूरी होता है। उन्होंने उस “मज़दूर भावना” से रायपुर को संवारा जिसमें हर ईंट, हर पत्थर एक बड़े सपने को आकार देता है।
कृषि क्षेत्र में भी बृजमोहन अग्रवाल की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही। लगातार तीन साल तक छत्तीसगढ़ को कृषि कर्मण पुरस्कार दिलाना एक बड़ी प्रशासनिक सफलता के साथ ही साथ किसानों के श्रम के प्रति सम्मान भी है। उनका यह दृष्टिकोण भी, मज़दूर दिवस की मूल भावना से मेल खाने वाला है जिसमें श्रम को केवल मेहनत नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार माना जाता है। राजनीति में आरम्भ से ही बृजमोहन का संघर्ष किसी मज़दूर की मेहनत से कम नहीं रहा। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की नीतियों के विरोध में काला झंडा दिखाने से लेकर जेल जाने तक उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर संघर्ष किया है। उनका यही जुझारूपन उन्हें एक सामान्य नेता से अलग बनाता है।
